Sunday, 22 March 2015

देश का दूसरा संजय गांधी !

अनुशासन ही देश को महान बनता है! मेरी दूसरी कक्षा में  में संजय गांधी से प्रभावित एक विद्रोही लेकिन पियक्कड़ गुरूजी रोज इक सुक्ति  को ब्लैक बोर्ड पर लिख कर इससे दो पन्नो में लिखने को दे देते थे. कहते थे की अक्षर बना कर लिखो.  सोचता था की किसी महात्मा गांधी टाइप महापुरुष के शब्दों में कुछ गंभीरता होगी. सयाना हुआ तो मालूम चला की ये भारत के लुई १४ वें होने के राह पर शहीद हो चुके संजय गांधी के शब्द थे। खूब हंसा,अपने गुरूजी के विद्रोही मन पर, आज फिर से भारत के दूसरे संजय गांधी टाइप प्रधान मंत्री के मन की बात सुन सुन कर डर  लगता है। भाई, सिर्फ आपके मन की बात तो ठीक नहीं है।  सुनाने को तो आप खूब आतुर है , मगर सुनने को तैयार नहीं।  ऐसा कैसे चलेगा? आप की मर्जी हो तो रेडियो पर कब्ज़ा कर ले, जमीं पर कब्ज़ा कर ले, और जब साथ में अम्बानी और अडानी हो तो आप  भक्तों के जमीर पर भी कब्ज़ा कर ले. आपकी सारी सोच संजय गांधी वाली लगती है. और हाँ! गुरूजी की दिए  टास्क में तो गंभीरता थी। लेकिन अफ़सोस की मैं आज तक गंभीर नहीं हो पाया ! 


भारत धर्म के विरुद्ध आवाज उठाने वाले हर शख्स के अभिमान का गला दबाने को आतुर भीष्म के रण में हर योद्धा का स्वागत है !